गुरु जम्भेश्वर जी की सच्ची कहानी: क्यों झुक गया सिकंदर लोदी?
एक ऐसा गुरु, जिसने आज से 500 साल पहले दुनिया के अंत की चेतावनी दे दी थी!
क्या आप किसी ऐसे इंसान की कल्पना कर सकते हैं, जिसने आज से लगभग 500 साल पहले ही ग्लोबल वार्मिंग, जंगलों का कटना और पानी के संकट जैसी आधुनिक दुनिया की महामारियों को भांप लिया था? एक ऐसा रहस्यमयी बच्चा, जो शुरुआती 7 साल तक एक शब्द भी नहीं बोला, लेकिन जब उसने अपनी जुबान खोली, तो दुनिया को जीने का एक ऐसा तरीका दे दिया जो आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए रिसर्च का विषय बन चुका है। यह कहानी है महान दूरदर्शी संत, पर्यावरण वैज्ञानिक और बिश्नोई समाज के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर जी (जाम्भोजी) की, जिन्होंने प्रकृति को बचाने के लिए राजाओं तक को अपने पैरों पर झुका दिया था।
यह बात है साल 1451 (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) की। राजस्थान के नागौर जिले के पीपासर गाँव में एक ठाकुर परिवार में जाम्भोजी का जन्म हुआ। बचपन से ही वे आम बच्चों से बिल्कुल अलग थे। वे शांत रहते, कम बोलते और जंगल में गायें चराने जाया करते थे। लेकिन साल 1485 में राजस्थान में एक ऐसा भयंकर अकाल पड़ा, जिसने सब कुछ तबाह कर दिया। कई सालों तक एक बूंद पानी नहीं बरसा, पेड़-पौधे सूख गए और बेजुबान जानवर तड़प-तड़प कर मरने लगे। लोग भुखमरी के कारण अपने ही हाथों हरे पेड़ों को काटने लगे और जानवरों का शिकार करने लगे।
इस खौफनाक मंजर ने जाम्भोजी के दिल को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने देखा कि इंसान अपनी भूख मिटाने के लिए उस प्रकृति का ही कत्ल कर रहा है जो उसे पालती है। उन्होंने समझ लिया था कि अगर इंसान को बचाना है, तो सबसे पहले पर्यावरण को बचाना होगा।
इसी अकाल के बीच, उन्होंने बीकानेर के समराथल धोरा नामक स्थान पर लोगों को इकट्ठा किया और एक नए जीवन मार्ग की शुरुआत की। उन्होंने समाज को जीने के लिए '29 नियम' (20 + 9 = बिश्नोई) दिए। इन 29 नियमों में से सबसे महत्वपूर्ण नियम थे—हरे पेड़ नहीं काटना और किसी भी जीव की हत्या न करना। उन्होंने साफ कहा था कि पेड़ और जीव-जंतु हमारे परिवार का हिस्सा हैं, उनके बिना इंसान का वजूद खत्म हो जाएगा।
जाम्भोजी की बातें सिर्फ उपदेश नहीं थीं, उनके वचनों में इतनी शक्ति और चमत्कारी प्रभाव था कि उस दौर के बड़े-बड़े राजा और सुल्तान भी उनके सामने नतमस्तक हो गए। दिल्ली का सुल्तान सिकंदर लोदी, जोधपुर के राव जोधा और बीकानेर के राव बीका जैसी बड़ी हस्तियां जाम्भोजी के दर्शन करने समराथल धोरा आईं। जाम्भोजी के प्रभाव के कारण ही इन क्रूर शासकों को भी अपने राज्यों में जीव हत्या और हरे पेड़ काटने पर पूरी तरह पाबंदी लगानी पड़ी थी।
जाम्भोजी ने समाज को केवल पूजा-पाठ करना नहीं सिखाया, बल्कि उन्होंने कर्म और विज्ञान को धर्म से जोड़ा। उन्होंने समझाया कि धरती पर हर एक छोटे जीव और वनस्पति का एक संतुलन है। अगर हम उस संतुलन को बिगाड़ेंगे, तो प्रकृति खुद हमारा विनाश कर देगी।
आज जब पूरी दुनिया क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण प्रदूषण से जूझ रही है, तब जाम्भोजी के वो 29 नियम और उनकी दूरदर्शिता हमें याद दिलाती है कि हमारे पूर्वज कितने महान वैज्ञानिक थे। अमृता देवी बिश्नोई जैसी वीरांगना और ३६३ शहीदों ने जो बलिदान दिया, उसकी असली ताकत और संस्कार गुरु जाम्भोजी की इसी शिक्षा से आए थे।
गुरु जाम्भोजी केवल एक संत नहीं, बल्कि इस धरती के सबसे पहले और सबसे महान पर्यावरण रक्षक थे, जिनका जीवन और विचार आज की सोई हुई इंसानियत को जगाने के लिए सबसे बड़ी मशाल है।
गुरु जाम्भोजी ने पर्यावरण, स्वास्थ्य, सदाचार और अध्यात्म को मिलाकर 29 नियम (20 + 9 = बिश्नोई) बनाए थे। ये नियम आज के समय में भी एक बेहतरीन और वैज्ञानिक लाइफस्टाइल जीने का तरीका सिखाते हैं।
इन 29 नियमों को 4 मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
1. पर्यावरण और जीव संरक्षण (Nature & Wildlife Protection)
-
1. हरे वृक्ष नहीं काटना: खासकर 'खेजड़ी' के पेड़ को कभी नुकसान न पहुंचाना।
-
2. जीव हत्या नहीं करना: किसी भी बेजुबान जानवर, पक्षी या कीड़े-मकोड़े को न मारना और उनकी रक्षा करना।
-
3. थाट (बैल/सांड) को अमर रखना: बूढ़े या बीमार पशुओं को लावारिस न छोड़ना, उनका पालन-पोषण करना।
-
4. नील का त्याग करना: नीले रंग के कपड़ों का त्याग (क्योंकि उस जमाने में नील की खेती से जमीन बंजर होती थी और कीड़े मरते थे)।
2. स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वच्छता (Health & Personal Hygiene)
-
5. रोज सुबह स्नान करना: शरीर की शुद्धि के लिए सूर्योदय से पहले नहाना।
-
6. पानी छानकर पीना: पानी को छानकर पीना ताकि पानी भी साफ रहे और उसमें मौजूद छोटे जीव भी सुरक्षित रहें।
-
7. दूध छानकर पीना: दूध को हमेशा छानकर उपयोग में लेना।
-
8. ईंधन (लकड़ी) छानकर जलाना: सूखी लकड़ियों को जलाते वक्त देख लेना कि उसमें कोई कीड़ा या चींटी न हो।
-
9. सूतक का पालन करना: बच्चे के जन्म के बाद माता और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए 30 दिन का सूतक (आइसोलेशन) रखना।
-
10. रजस्वला नियम: महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान 5 दिन का विश्राम देना और घरेलू कामों से दूर रखना।
3. सामाजिक सदाचार और नैतिक नियम (Social & Moral Codes)
-
11. शील (संतोष) रखना: मन में सब्र और संतोष की भावना रखना।
-
12. संतोष का पालन: लालच न करना।
-
13. चोरी न करना: किसी भी परिस्थिति में चोरी या बेईमानी न करना।
-
14. निंदा न करना: पीठ पीछे किसी की बुराई या चुगली न करना।
-
15. झूठ न बोलना: हमेशा सत्य का साथ देना।
-
16. वाद-विवाद न करना: बिना बात की बहस या झगड़ों से दूर रहना।
-
17. क्षमा करना: दूसरों की गलतियों को माफ करने का बड़ा दिल रखना।
-
18. दया भाव रखना: हर इंसान और जीव के प्रति दयालु रहना।
-
19. चोरी-जारी (परस्त्री गमन) का त्याग: चरित्र को साफ और पवित्र रखना।
4. नशामुक्ति और अध्यात्म (De-addiction & Spirituality)
-
20. अफीम का त्याग: अफीम या किसी भी तरह के ड्रग्स का सेवन न करना।
-
21. भांग का त्याग: भांग के नशे से दूर रहना।
-
22. मदिरा (शराब) का त्याग: शराब को हाथ न लगाना।
-
23. तंबाकू का त्याग: तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट का सेवन न करना।
-
24. मांस का त्याग: पूरी तरह से शाकाहारी जीवन जीना।
-
25. अमावस्या का व्रत: हर महीने की अमावस्या को व्रत रखना और आत्म-निरीक्षण करना।
-
26. भगवान विष्णु का भजन: ईश्वर की आराधना करना।
-
27. सांध्य आरती करना: शाम के समय ईश्वर की स्तुति करना।
-
28. प्रातःकाल हवन (यज्ञ) करना: रोज सुबह घी और सामग्री से हवन करना (जिससे वातावरण शुद्ध होता है)।
-
29. प्रेम और विनय: सभी के साथ प्रेम, आदर और विनम्रता से पेश आना।