सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जनरल कटऑफ पार करने वाले आरक्षित अभ्यर्थी जनरल में गिने जाएंगे सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जनरल कटऑफ पार करने वाले आरक्षित अभ्यर्थी जनरल में गिने जाएंगे
सामान्य कटऑफ से ज्यादा अंक लाने वाले आरक्षित अभ्यर्थी जनरल में गिने जाएंगे | Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला
भारत में सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण (Reservation) हमेशा से एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/EWS) का उम्मीदवार सामान्य कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में गिना जाएगा।
मामला किस बारे में है? (Case Background)
यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क भर्ती 2022 से जुड़ा है। आरक्षित वर्ग के कुछ उम्मीदवारों ने जनरल कटऑफ से ज्यादा अंक लिए, लेकिन उन्हें आरक्षित कोटे में रखा गया, जिससे जनरल उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। राजस्थान हाईकोर्ट ने मेरिटोरियस आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल में शामिल करने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: ओपन/जनरल कैटेगरी किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है। यह पूरी तरह मेरिट पर आधारित है। आरक्षित उम्मीदवार अगर बिना छूट के जनरल मेरिट में आता है, तो उसे जनरल माना जाएगा। डबल बेनिफिट नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में कहा:
🔹 Open / General Category किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है
🔹 यह पूरी तरह मेरिट (योग्यता) पर आधारित होती है
🔹 आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना किसी छूट (Relaxation) के चयनित होता है, तो वह जनरल माना जाएगा
🔹 ऐसा करने से आरक्षण का दोहरा लाभ (Double Benefit) नहीं दिया जा सकता
“खुली श्रेणी” का अर्थ क्या है? (Meaning of Open Category)
बहुत से उम्मीदवारों में यह भ्रम होता है कि:
“जनरल सीट सिर्फ जनरल कैंडिडेट के लिए होती है”
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्पष्ट किया:
खुली श्रेणी (Open Category) का मतलब है –
👉 वह सीट जो केवल मेरिट के आधार पर भरी जाती है
इसमें जाति, वर्ग या आरक्षण का कोई हस्तक्षेप नहीं होता
यदि कोई SC/ST/OBC उम्मीदवार:
बिना आयु छूट
बिना कटऑफ छूट
बिना फीस छूट
के जनरल मेरिट में चयनित होता है, तो वह जनरल माना जाएगा।
आरक्षण का उद्देश्य और यह फैसला
आरक्षण का उद्देश्य और यह फैसला
आरक्षण पिछड़े वर्गों को अवसर देने के लिए है, लेकिन योग्यता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मेरिटोरियस आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल में रखने से आरक्षित सीटें जरूरतमंदों को मिलेंगी।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए:
जनरल कटऑफ: 75 अंक
OBC उम्मीदवार के अंक: 82
ऐसे में:
उस OBC उम्मीदवार को जनरल कैटेगरी में रखा जाएगा
OBC कोटे की सीट किसी अन्य जरूरतमंद OBC उम्मीदवार को मिलेगी
भविष्य की भर्तियों पर असर
यह फैसला UPSC, SSC, RPSC, रेलवे, बैंक, पुलिस आदि सभी भर्तियों पर लागू होगा। मेरिट लिस्ट अब अधिक पारदर्शी बनेगी।
निष्कर्ष
यह फैसला आरक्षण की भावना को सुरक्षित रखते हुए मेरिट का सम्मान करता है। योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा।
FAQs
Q1. आरक्षण खत्म हो गया? → नहीं।
Q2. आरक्षित उम्मीदवार जनरल सीट ले सकते हैं? → हाँ, अगर मेरिट में हैं।
Q3. पूरे भारत में लागू? → हाँ।
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