तारपुरा एयरपोर्ट: किसानों का विरोध | सीकर राजस्थान
तारपुरा में एयरपोर्ट के लिए किसानों का विरोध: विकास बनाम किसानों की आजीविका की लड़ाई
परिचय: जब विकास की आंधी किसानों की जमीन उड़ा ले जाती है
राजस्थान के सीकर जिले में तारपुरा (तारापुरा) और दादिया गांवों के आसपास एक नया विवाद गरमा रहा है। सरकार तारपुरा हवाई पट्टी को ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में विकसित करने की योजना बना रही है, लेकिन स्थानीय किसान इसे अपनी जमीन, खेती और जीविका पर हमला मान रहे हैं। हजारों किसान ट्रैक्टर मार्च निकालकर, महापंचायतें कर और कलेक्ट्रेट घेरकर अपना विरोध जता रहे हैं।
यह सिर्फ एक एयरपोर्ट का मुद्दा नहीं है। यह उपजाऊ कृषि भूमि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा की लड़ाई है।
क्या है पूरा मामला?
तारपुरा क्षेत्र में पहले से एक हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) मौजूद है। सरकार इसे विस्तारित करके बड़े एयरपोर्ट में बदलना चाहती है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट के तहत करीब 4000 बीघा (लगभग 450-500 हेक्टेयर) उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण करने की तैयारी है। इसमें तारपुरा, दादिया और आसपास के गांव शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि:
- यह भूमि बहु-फसली और बेहद उपजाऊ है।
- अधिग्रहण से गांव उजड़ जाएंगे और लोग पलायन को मजबूर होंगे।
- गोचर भूमि (166 हेक्टेयर), गौशाला (10 हेक्टेयर), मंदिर, चबूतरे, स्कूल, अस्पताल आदि सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होंगी।
इसके साथ ही नवलगढ़-बेरी-बसावा सीमेंट प्लांट के लिए रेलवे लाइन और जेरठी-दादिया अंडरपास जैसे अन्य प्रोजेक्ट भी किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
किसानों का विरोध: ट्रैक्टर मार्च से कलेक्ट्रेट महापड़ाव तक
हाल के दिनों में विरोध तेज हुआ है:
- किसान ट्रैक्टरों, बसों और गाड़ियों के काफिले लेकर सीकर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
- एक प्रदर्शन में 34 बसें, 80 ट्रैक्टर, 100+ गाड़ियां और सैकड़ों बाइक शामिल थीं।
- महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं।
- महापंचायतें हुईं, ज्ञापन दिए गए और नारे लगाए गए – “एक इंच जमीन भी नहीं देंगे”, “जमीन बचाओ, गांव बचाओ”।
किसानों की मुख्य मांगें:
- बिना ग्राम सभा और किसानों की लिखित सहमति के कोई भी भूमि अधिग्रहण न हो।
- एयरपोर्ट और रेलवे लाइन पर प्रशासन किसानों से सीधा संवाद करे।
- जेरठी-दादिया अंडरपास की डिजाइन पर आपत्तियों का समाधान हो।
- सीमेंट प्लांट और रेल लाइन खेतों के बजाय बंजर जमीन या वैकल्पिक रूट से गुजरे।
किसान नेता सतपाल धींवा जैसे लोगों ने कहा कि एयरपोर्ट बनने से देवस्थान खंडित होंगे और पूरा क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा।
किसानों के तर्क: विकास की कीमत कौन चुकाएगा?
किसान विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सवाल उठाते हैं:
- कृषि vs औद्योगिक विकास: सीकर का यह क्षेत्र खेती पर निर्भर है। जमीन छिनने से बेरोजगारी बढ़ेगी।
- पर्यावरणीय प्रभाव: एयरपोर्ट से शोर, प्रदूषण और जल संसाधनों पर दबाव।
- विकल्प की मांग: यदि एयरपोर्ट जरूरी है तो बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर बनाया जाए।
- पुनर्वास की चिंता: मुआवजा पर्याप्त नहीं होता; लोग अपनी जड़ों से उखड़ जाते हैं।
सरकार और विकास पक्ष का नजरिया
सरकार का तर्क है कि एयरपोर्ट से क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा – बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार, पर्यटन और व्यापार बढ़ेगा। जयपुर एयरपोर्ट पर लोड कम होगा। लेकिन फिलहाल किसानों के साथ संवाद की कमी दिख रही है, जिससे आंदोलन तेज हो रहा है।
निष्कर्ष: संतुलित विकास की जरूरत
तारपुरा का किसान आंदोलन भारत के कई हिस्सों में हो रहे ऐसे ही संघर्षों की याद दिलाता है। विकास आवश्यक है, लेकिन उसे किसानों की सहमति, पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक विकल्पों के साथ लाना चाहिए। जबरन अधिग्रहण से नाराजगी बढ़ती है और विकास टिकाऊ नहीं रहता।
सरकार को चाहिए कि किसानों से खुली चर्चा करे, उनकी मांगों पर विचार करे और यदि जरूरी हो तो प्रोजेक्ट को वैकल्पिक जगह शिफ्ट करे। किसानों को भी चाहिए कि वे बातचीत के रास्ते खुले रखें।
तारपुरा के किसान कह रहे हैं – “जमीन हमारी मां है, उसे नहीं छोड़ेंगे।” क्या सरकार इस ममता को समझ पाएगी?